किसी पिता की तरह

8 बजते ही टीवी पर सारे देश की नजरें थी
मोदी सर का उद्बोधन आने वाला था
यु तो उनके उद्बोधन हमेसा ही कुछ नया सिखाते है
पर उस दिन 21 दिन का लॉक डाउन करते समय उनके स्वर 
में जो देश और देशवासियों के प्रति चिंता थी 
जैसे कोई पिता अपनी संतान को बुरी नजर से बचकर
अपने दामन में समेटे लेना चाहता हो 
ओर खुद सामने बढ़कर हर मुश्किल का सामना कर रहा हो
सच मे उस दिन ओर आज तक मोदी जी के वो शब्द याद करके
गर्मी की छुट्टियों में पापा का डांटना याद आता है



अंदर चलो वरना लू लग जाएगी

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