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Showing posts from 2020

अब क्या होगा

पहले ही हम लोग परेशान हैं कि कैसे ऑपरेशन होगा भाई का पैसे की व्यवस्था कैसे होगी ।और यँहा लोकदोउन 17 तारीख तक ओर बढ़ गया ।जो विदेश गए और वंहा से बीमारी लेकर आये वो तो मजे से घर पर हैं।ओर जो गरीब है पैसा नही है वो दंड भुगत रहा है भगवान किसी को गरीब मत बनाना

ये कैसे दिन हैं

आज भईया को दुबारा पाइप लगे इक्कीस दिन हो गए।जब हम उसे 13 मार्च को पहली बार डॉक्टर के पास ले गए तो यूरिन पास न होने के कारण उसे नाभि के निचे चीरा लगा कर पाइप लगा दिया ।कि इससे हालफिलहाल यूरिन पास होगा।और अगली बार लॉक डाउन होजाने के कारण सरकारी अस्पताल में जरनल ओ पी डी बंद होग हैया ।प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए बहुत पैसे चाहिए।मै प्राइवेट जॉब करती हूं।और वँहा भी अभी बंद है।वैसे भी वो लोग शायद ही इतने  इतने पैसे देते।अगर आज शासकीय अस्पताल खुला होता तो कितना अच्छा होता।भाई को पाइप गड़ता है दर्द भी होता है ।मै उसे झूठ तसल्ली देती हूं।पर क्या ये ठीक है।भगवान को गरीबों की ही परीक्षा ले रहे हैं।पर मैं बहुत कमजोर हूँ भगवान आप दया करदो ओर भाई को स्वस्थ करदो

साफ हुआ पतित पावनी गंगा का जल

आधुनिक समाज के अभिश्राप से मनुष्य और जीव जंतुओं के अतिरिक्त हवा और पानी भी विषैले हो चले हैं जँहा एक तरफ हवा में मर्करी ,कार्बन, सल्फर की मात्रा बढ़ कर उसे सांस लेने के लिए अनुपयोगी बना रही है वंही 

एक उभरते हुए लेखक की कहानी

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शायद आपको याद हो कि अस्सी नब्बे के दशक में जबकि इंटरनेट और मोबाइल नही था और नही इतने मनोरंजन के संसाधन थे उस समय लोगों के बीच किताबों ,पत्रिकाओं, कॉमिक्स ओर दूरदर्शन का बड़ा ट्रेड था।केन यू बिलीव इट की 80के दशक में लोग एक सीरियल देखने के लिए एक एक हफ्ते इंतजार करते थे एक उपन्यास की एडवांस प्रति महीनों पहिले बुक हो जाती थी।ऐसे समय मे बड़े हुए बच्चों में लेखन कला भी गजब की देखी गई है उनकी बौद्धिक क्षमता और समस्याओं और दुनिया के प्रति उनका नजरिया कुछ अलग ही था।ऐसे ही बचपन मे नॉवल पढ़ के बड़ी हुई एकपीढ़ी के एक उभरते लेखक है अजिंक्य शर्मा अपनी सस्पेंस फुल और धार दार लेखनी के कारण इन्होंने अपने पाठकों के दिलों में बहुत ही कम से वर्तमान में  लेखक के तीन उपन्यास अमेजन किंडल पर उपलब्ध हैं तथा पाठकों द्वारा सराहे जा रहे है।जैसा कि कहागया है कि पौधे को पानी और लेखक को उत्साह वर्धन सिंचित करता है अतः आप सब को भी इस लेखक की उपन्यास अवश्य पड़नी चाहिए इनकी लेखनी में एक धरप्रवाहिता है जो कहानी के सुरु से अंत तक आपको बंधे रखती है और एक तीव्र गतिगामी फ़िल्म की तरह आपका मनोरंजन करती है ।कहानियों के उता...

क्या तुमने वो दिया जलाया

क्या तुमने वो दीप जलाया? हरे जो अंतस का अंधियारा जिससे तमस का रावण हारा खत्म करे जग का अंधेरा लाये जो इक नया सवेरा वो तारा तुमने चमकाया? क्या तुमने वो दीप जलाया? आज अगर है मुश्किल रस्ता खुशियों का न मोल है सस्ता खुद को वज्र सा सबल बनाओ मेहनत से आगे बढ़ जाओ हिम्मत से ही सब हो पाया क्या तुमने वो दीप जलाया? कट जाएँगे मुश्किल दिन भी आएंगें फिर अच्छे दिन भी मत निराश हो, बनो साहसी ज्योति जलाओ जीवन प्रकाश-सी बन कर जीवन की प्रतिछाया क्या तुमने वो दीप जलाया? 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹🌹🌹     ====ब्रजेश कुमार शर्मा

इज्जत

सुबह से माही की नजर न्यूज़ चैनल पर थी,थोड़ी थोड़ी देर में अपने जरूरी काम निपटाते हुए वो न्यूज़ भी सुनती जा रही थी।उफ..............कितना दर्दनाक दृश्य है ,लोग दर्द से झटपटा रहे है और डॉक्टर उन्हें संभाल रहे है।पुलिस भी अपना सख्त रवैया छोड़ कर लोगों को ऐसे समझा रही है जैसे कोई छोटे बच्चे को समझा रहा हो ।बहुत खतरनाक बीमारी है ये कृपया आपस मे न मिले जुले सोसल डिस्टेंसिंग का पालन करें।न्यूज़ रिपोर्टर के शब्द माही के कानों में गूंज उठे।वह आता गूंधना छोड़ कर टीवी के पास चली गई।जैसे बहुत जरूरी सूचना अब मिलने ही वाली हो।तभी फोन की घंटी ने उसका ध्यान भंग कर दिया।मोबाइल उठाकर नंबर देखा तो शान्ता बहन का नंबर था।माही ने एक लंबी आह भरी इस घड़ी वो अगर किसी से बात नही करना चाहती थी तो वो शान्ता बहन थीं।मोबाइल लगातार बज रहा ओर माही उसे घूरे जा रही थी।ये सिलसिला न जाने कब तक चलता यदि वीना की आवाज उसका ध्यान भंग न करती।मम्मी प्लीज मोबाइल उठा लो कोई जरूरी कॉल हो सकता है।माही ने वीना के बंद कमरे के दरवाजे को देखा और आह भरते हुए मोबाइल उठा लिया। हैलो, मै शान्ता बोल रही हूँ,शान्ता की तल्ख आवाज उसके कानों से टकराई...

जिंदगी खूबसूरत बनादो

ख्वाब पलकों फिर से सजा दो जिन्दी खूबसूरत बनादो खत्म होजाये मुश्किलें सारी मेरे ईस्वर करिश्मा दिखादो फिरसे मुस्काये अपना जंहा ये हर चहरा खिला हो यंहा पे जागे आसा की ऐसी ज्योति जला दो मेरे ईस्वर एकबार फिर से जिंदगी खूबसूरत बनादो
चटपटी चाट मीठी बात आज कल सभी को घर मे रहना पड़ रहा है ,जो कि एक आवश्यक जिम्मेदारी है।मगर घर मे सबका एक साथ उपस्थित होना और फिर मीठी यादो का दौर सुरु होना क्या बताऊँ कभी आंखों में पानी कभी होठो पे हंसी ला देता है।और कभी कभी माहौल को दमदार बनाने केलिए एक मजेदार नास्ते की भी जरूरत पड़ जाती है मगर बाहर तो निकलना नई है तो क्या बनाये की घर मे सब खुश हो जाये ।और तनाव के इस माहौल में कुछ कमी आजाये।तो मैने सोचा है कि क्योना इन मीठी बातो के साथ चटपटी चाट बनाई जाए इडली की चाट इसे बनाना बहुत आसान था मेने एक कटोरी सूजी में घर का जमाया आधा कटोरी दहि डाला आधा चम्मच ईनो डाला दोनों को खूब फेंट कर  इडली का बेटर बना लिया  ओर अपने चौबीस सांचे वाली इडली के सांचे में चौबीस इडली बनाई अब इन इडली में राई जीरे का तड़का लगा कर  थोड़ी सी चिली सॉस ओर टॉमेटो सॉस भी ऊपर से डाल दी कसम से इतनी टेस्टी चाट बनी साम को महाभारत देखते देखते सबने  बड़े सोक से खाई तो आप भी बनिये ओर अपने घर में भी चटपटी चाट पर मीठी बात का मजा लीजिये

गौर से देखा

आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ देखने का टाइम ही नही मिलता बस कभी ये काम कभी वो काम खाना बच्चे जॉब ओर रोज मर्रा की जरूरतें आज सालो बाद लगा कि घर को परिवार को पास से देखा भगवान सबकी रक्षा करे घर मे रहे परिवार को देखे वो आपकी ओर आप उनकी दुनिया हो ओर अगर कदम दरवाजे की ओर बड़े तो तो देखिये घर के अंदर कितनी नजरो ने आपको गौर से देखा सो प्ले

किसी पिता की तरह

8 बजते ही टीवी पर सारे देश की नजरें थी मोदी सर का उद्बोधन आने वाला था यु तो उनके उद्बोधन हमेसा ही कुछ नया सिखाते है पर उस दिन 21 दिन का लॉक डाउन करते समय उनके स्वर  में जो देश और देशवासियों के प्रति चिंता थी  जैसे कोई पिता अपनी संतान को बुरी नजर से बचकर अपने दामन में समेटे लेना चाहता हो  ओर खुद सामने बढ़कर हर मुश्किल का सामना कर रहा हो सच मे उस दिन ओर आज तक मोदी जी के वो शब्द याद करके गर्मी की छुट्टियों में पापा का डांटना याद आता है अंदर चलो वरना लू लग जाएगी

बचपन की यादे

हेलो दोस्तों आपको याद है आपका सबसे प्यारा सबसे सुनहरा सबसे अच्छा वक्त कोनसा साथा जी हां वो वक्त था हमारा बचपन बचपन के वो सुनहरे दिन माँ का गुस्सा ,दादी का प्यार दोस्तों से लड़ाई वो खट्टी ओर फिर बट्टी पतंगों के पीछे दौड़ना पॉपिंस के लिए लड़ना अच्छा सच बताइए आपमे से कितने लोगों ने पॉपिंस की गोलियां के कलर मैच करके उनका अलग बंडल बनाया ओर कौन कौन कुल्फी की घण्टी सुन बिना चप्पल गली में दौड़ा सच क्या दिन थे और उस समय हमने कभी सोचा भी नही था कि धूल में गिरे बेर उठा कर खाने से कोनसा वायरस हमे नुकसान पहुचायेगा ........... ......... ........ओ मेरे बचपन कँहा चले गए तुम ...... .

मेरा अपना ब्लॉग

सो ....... हाय फ्रेंड्स सुनैना दिल से में आप सभी का हार्दिक अभीवादन है कुछ अलग नाम हैं मेरे ब्लॉग का जैसे कि सुनेंना दिल से हा हा हा हा हा.......... वैसे मुझे लिखना विखना आता तो नही पर दोस्तो ने कहा कि हमारा दिमाग खाने की जगह तू ब्लॉग लिखने लग ,,तो बस मेरा ये ब्लॉग और इसकी फर्स्ट पोस्ट आपके सामने है