इज्जत

सुबह से माही की नजर न्यूज़ चैनल पर थी,थोड़ी थोड़ी देर में अपने जरूरी काम निपटाते हुए वो न्यूज़ भी सुनती जा रही थी।उफ..............कितना दर्दनाक दृश्य है ,लोग दर्द से झटपटा रहे है और डॉक्टर उन्हें संभाल रहे है।पुलिस भी अपना सख्त रवैया छोड़ कर लोगों को ऐसे समझा रही है जैसे कोई छोटे बच्चे को समझा रहा हो ।बहुत खतरनाक बीमारी है ये
कृपया आपस मे न मिले जुले सोसल डिस्टेंसिंग का पालन करें।न्यूज़ रिपोर्टर के शब्द माही के कानों में गूंज उठे।वह आता गूंधना छोड़ कर टीवी के पास चली गई।जैसे बहुत जरूरी सूचना अब मिलने ही वाली हो।तभी फोन की घंटी ने उसका ध्यान भंग कर दिया।मोबाइल उठाकर नंबर देखा तो शान्ता बहन का नंबर था।माही ने एक लंबी आह भरी इस घड़ी वो अगर किसी से बात नही करना चाहती थी तो वो शान्ता बहन थीं।मोबाइल लगातार बज रहा ओर माही उसे घूरे जा रही थी।ये सिलसिला न जाने कब तक चलता यदि वीना की आवाज उसका ध्यान भंग न करती।मम्मी प्लीज मोबाइल उठा लो कोई जरूरी कॉल हो सकता है।माही ने वीना के बंद कमरे के दरवाजे को देखा और आह भरते हुए मोबाइल उठा लिया।
हैलो, मै शान्ता बोल रही हूँ,शान्ता की तल्ख आवाज उसके कानों से टकराई जी बोलिये......माही ने अनमने ढंग से कहा।
उधर से शान्ता की आवाज आई माही बहन मै तो ये पूछ रही थी कि आप लोगो की तैयारी पूरी हो गई क्या।कैसी तैयारी माही ने अंजान बनते हुए कहा ।अरे शादी की तैयारी और किस बात की तैयारी




क्रमशः

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